सेना में सेवा के दौरान हुई बीमारी को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता : Disability Pension पर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण सिद्धांत

हर सैनिक और पूर्व सैनिक को जानना चाहिए अपना यह कानूनी अधिकार

देश की रक्षा करते समय सैनिक केवल सीमाओं पर दुश्मन से ही नहीं लड़ते, बल्कि कठिन मौसम, मानसिक तनाव, लंबी ड्यूटी, पारिवारिक दूरी और शारीरिक चुनौतियों का भी सामना करते हैं। ऐसे में यदि किसी सैनिक को सेवा के दौरान कोई बीमारी या दिव्यांगता विकसित हो जाती है, तो क्या उसे केवल इस आधार पर Disability Pension से वंचित किया जा सकता है कि बीमारी युद्धक्षेत्र में नहीं हुई?

हाल के वर्षों में सुप्रीम कोर्ट, Armed Forces Tribunal (AFT) तथा विभिन्न हाई कोर्टों ने बार-बार स्पष्ट किया है कि यदि कोई सैनिक भर्ती के समय पूरी तरह स्वस्थ पाया गया था और बाद में सेवा के दौरान किसी बीमारी या दिव्यांगता से ग्रसित हो जाता है, तो सामान्यतः उस बीमारी को सैन्य सेवा से संबंधित माना जाएगा।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का हालिया निर्णय इसी महत्वपूर्ण सिद्धांत को दोबारा मजबूत करता है और हजारों सैनिकों, पूर्व सैनिकों तथा उनके परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया है।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

एक सेवानिवृत्त वायुसेना सार्जेंट ने लगभग 27 वर्षों की सेवा के बाद Diabetes Mellitus Type-II बीमारी विकसित की। मेडिकल बोर्ड ने इसे “Neither Attributable Nor Aggravated (NANA)” घोषित करते हुए Disability Pension देने का विरोध किया।

मामला अदालत पहुंचा, जहां हाई कोर्ट ने कहा कि:

यदि सैनिक भर्ती के समय पूरी तरह फिट था और बाद में सेवा के दौरान बीमारी विकसित हुई, तो उसे सामान्यतः सैन्य सेवा से संबंधित माना जाएगा, जब तक कि सरकार इसके विपरीत ठोस प्रमाण प्रस्तुत न कर दे।

अदालत ने सरकार की याचिका खारिज करते हुए Disability Pension का लाभ बरकरार रखा।

यह फैसला केवल एक सैनिक की जीत नहीं, बल्कि सभी दिव्यांग सैनिकों के अधिकारों की पुनः पुष्टि है।

Disability Pension का सबसे महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत

भारतीय सैन्य कानून में एक अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्धांत है: “Presumption of Sound Health”

इसका अर्थ है कि यदि भर्ती के समय मेडिकल जांच में कोई बीमारी दर्ज नहीं थी, तो सैनिक को पूर्णतः स्वस्थ माना जाएगा।

यदि बाद में सेवा के दौरान कोई बीमारी उत्पन्न होती है, तो कानून यह मानकर चलता है कि उसका संबंध सैन्य सेवा से है।

इस स्थिति में:

✔ सैनिक को बीमारी का कारण सिद्ध नहीं करना पड़ता।

✔ सरकार को साबित करना पड़ता है कि बीमारी का सेवा से कोई संबंध नहीं है।

✔ केवल मेडिकल बोर्ड की राय अंतिम नहीं मानी जाती।

✔ संदेह की स्थिति में लाभ सैनिक को दिया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले जिन्होंने बदली तस्वीर

1. Dharamvir Singh vs Union of India (2013)

Disability Pension मामलों में यह सबसे महत्वपूर्ण निर्णय माना जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा:

  • भर्ती के समय सैनिक स्वस्थ माना जाएगा।
  • सेवा के दौरान उत्पन्न बीमारी को सामान्यतः सेवा से संबंधित माना जाएगा।
  • प्रमाण का भार सैनिक पर नहीं बल्कि सरकार पर होगा।
  • मेडिकल बोर्ड को अपने निष्कर्षों के समर्थन में कारण बताने होंगे।

आज भी AFT और हाई कोर्ट के अधिकांश निर्णय इसी फैसले पर आधारित हैं।

2. Union of India vs Rajbir Singh (2015)

सुप्रीम कोर्ट ने Dharamvir Singh मामले में स्थापित सिद्धांतों की पुनः पुष्टि की।

अदालत ने कहा कि:

Pension Regulations का उद्देश्य सैनिकों का कल्याण है, इसलिए उनकी व्याख्या सैनिकों के पक्ष में उदारतापूर्वक की जानी चाहिए।

3. Bijender Singh vs Union of India

इस मामले में भी न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि भर्ती के समय कोई बीमारी दर्ज नहीं थी तो बाद में उत्पन्न बीमारी के मामले में Attributability की धारणा लागू होगी।

साथ ही Court ने Rounding Off Benefit के महत्व को भी स्वीकार किया।

हाल के वर्षों में सैनिकों को मिली बड़ी जीत

Diabetes Mellitus मामलों में राहत

हालिया फैसलों में अदालतों ने माना है कि Diabetes Mellitus जैसी बीमारी यदि सेवा के दौरान विकसित होती है तो उसे केवल “Lifestyle Disease” कहकर अस्वीकार नहीं किया जा सकता।

Hypertension (High Blood Pressure) मामलों में राहत

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक मामले में लगभग 17 वर्षों की सेवा के बाद विकसित हुए Hypertension को सैन्य सेवा से संबंधित माना।

अदालत ने कहा कि:

  • भर्ती के समय बीमारी मौजूद नहीं थी।
  • बीमारी सेवा के दौरान विकसित हुई।
  • इसलिए Disability Pension से इनकार नहीं किया जा सकता।

Benefit of Doubt का सिद्धांत

अनेक फैसलों में अदालतों ने कहा है कि यदि बीमारी के कारण को लेकर कोई संदेह हो तो उसका लाभ सैनिक को मिलना चाहिए, न कि सरकार को।

किन बीमारियों में Disability Pension मिल सकती है?

बहुत से सैनिक यह मानते हैं कि केवल युद्ध में लगी चोटों पर ही Disability Pension मिलती है।

वास्तविकता इससे कहीं व्यापक है।

न्यायालयों ने निम्नलिखित बीमारियों में भी Disability Pension के दावों को स्वीकार किया है:

  • Hypertension
  • Diabetes Mellitus
  • Ischemic Heart Disease
  • Psychiatric Disorders
  • Depression
  • Anxiety Disorders
  • Stress Related Disorders
  • Orthopaedic Disabilities
  • Neurological Disorders
  • Vision Related Disabilities

मुख्य प्रश्न यह नहीं है कि बीमारी युद्ध के दौरान हुई या नहीं, बल्कि यह है कि वह सेवा के दौरान विकसित हुई या नहीं।

क्यों खारिज हो जाते हैं कई वास्तविक दावे?

आज भी बड़ी संख्या में Disability Pension दावे निम्न कारणों से खारिज हो जाते हैं:

  • मेडिकल बोर्ड द्वारा NANA घोषित कर देना।
  • सैनिकों को कानूनी अधिकारों की जानकारी न होना।
  • मेडिकल बोर्ड की राय को अंतिम मान लेना।
  • समय रहते AFT में अपील न करना।

लेकिन वास्तविकता यह है कि अनेक सैनिकों ने AFT और हाई कोर्ट में जाकर ऐसे निर्णयों को सफलतापूर्वक चुनौती दी है।

यदि आपकी Disability Pension अस्वीकार हो गई है तो क्या करें?

यदि आपका दावा खारिज हुआ है, तो निम्न कदम उठाएं:

  1. Release Medical Board की प्रति प्राप्त करें।
  2. भर्ती के समय की Medical Examination Report देखें।
  3. जांचें कि बीमारी भर्ती के समय दर्ज थी या नहीं।
  4. मेडिकल बोर्ड द्वारा दिए गए कारणों का अध्ययन करें।
  5. Dharamvir Singh और Rajbir Singh जैसे फैसलों का संदर्भ लें।
  6. आवश्यकता पड़ने पर Armed Forces Tribunal (AFT) में अपील करें।
  7. सभी मेडिकल रिकॉर्ड और सेवा दस्तावेज सुरक्षित रखें।

जागरूकता ही अधिकार प्राप्ति का पहला कदम

Disability Pension कोई दया या अनुग्रह नहीं है। यह सैनिक द्वारा राष्ट्र की सेवा के बदले अर्जित किया गया कानूनी अधिकार है।

दुर्भाग्य से अनेक सैनिक और उनके परिवार केवल जानकारी के अभाव में अपने वैध अधिकारों से वंचित रह जाते हैं।

न्यायालय लगातार यह स्पष्ट कर रहे हैं कि भर्ती के समय स्वस्थ पाए गए सैनिक के लिए सेवा के दौरान उत्पन्न बीमारी को सामान्यतः सैन्य सेवा से संबंधित माना जाएगा। ऐसे मामलों में सरकार को ठोस प्रमाण देना होगा कि बीमारी का सेवा से कोई संबंध नहीं था।

निष्कर्ष

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का हालिया फैसला एक बार फिर यह संदेश देता है कि देश अपने सैनिकों के प्रति जिम्मेदार है। जो सैनिक वर्षों तक कठिन परिस्थितियों में राष्ट्र की सेवा करते हैं, उन्हें तकनीकी आधारों पर Disability Pension से वंचित नहीं किया जा सकता। हर दिव्यांग सैनिक, पूर्व सैनिक, युद्ध विधवा और परिवार के सदस्य को यह समझना चाहिए कि यदि भर्ती के समय बीमारी दर्ज नहीं थी और वह सेवा के दौरान विकसित हुई, तो कानून सामान्यतः उसे सैन्य सेवा से जुड़ा मानता है। अपने अधिकारों की जानकारी रखना ही न्याय और उचित पेंशन लाभ प्राप्त करने की दिशा में पहला कदम है।

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